How to select the best physician for your medical treatment?

Finding the right physician is crucial for any treatment. Your primary care physician is the person you will approach for all of your medical issues. They are there to assist you and make necessary decisions for your health by advising, educating, examining, and treating you. There are different types of doctors who can deliver prime care to a patient. Finding the proper doctor will require clarification of your wants and needs from a physician.

Amidst the wide choice, there are several practical aspects to consider before looking for a primary care physician. These factors include – area, eligibility, individual medical needs, and more. Choosing a physician that is far from your region or out of the network can be costly and cumbersome, that is why the following factors should be considered. Patients have a lot of alternatives when it comes to finding a new primary care physician.

It is important to find a doctor you can trust and openly share your problems with. But, when you’re going through a huge list of names on websites and in directories, it is not as easy to identify your health partner (physician). Here are some vital factors to consider while finding a primary care physician:

Recommendations from Friends and Family

Asking for referrals from people you trust is one method to find a primary care physician to fit your convenience. Your family, friends, and coworkers can provide you with valuable information about the doctors they go to.
You can also seek recommendations from allied health professionals like – pharmacists, dentists, physical therapists, and other healthcare professionals who may be able to provide you with useful information on primary care physicians. Furthermore, they may be able to make alternative medical recommendations for you to consider in your search.

Consider the Locality

Before making a decision, ask these questions – ‘How far is the hospital or the physician’s practice center’? ‘How long will it take to reach the place’. The doctor that you have chosen might fit all the brackets but if they are not near to where you live, it can be cumbersome to travel to get the appropriate treatment. Consider that how far is the doctor from your home, school, or office. You will find plenty of health professionals in certain localities while few or none in others. Hence, distance is a vital factor to consider here.

Availability of the Doctor

What are their practise hours? Are they available at the time of emergency or if you need them at night? Are on-call services available? How long does it take to get an appointment? Does the physician offer online check-ups and advice?

While selecting your primary care physician make sure you have the perfect answers to all the above-mentioned questions as per your needs and requirements. A doctor’s availability at any time is important for a patient and especially at the time of emergencies. Hence, make sure the doctor that you choose is easily available whenever you need them.

Is the staff friendly and professional?

You’ll interact with the hospital staff on a frequent basis. Many of your encounters with your primary care provider will be handled by other medical professionals like nurses, receptionists, compounders, etc. Their services would include scheduling and rescheduling appointments, addressing billing concerns, and requesting refills.
Consider these points – What is the staff’s approach towards your problem? Do they address your questions appropriately? Do they bridge the communication between you and the doctor?

Practitioners that meets your health and medical needs

Every doctor is a professional, but the biggest concern is whether they have expertise in the area where you seek proper treatment. A primary physician can be of any type – Family Practice, Internal Medicine, or General Practice. There are also pediatricians or doctors that specialize in children, who will function as your child’s main care physician.

  • Family Practice – The practitioners of FM are general physicians and treat people of all ages from newborns to the elderly.
  • Internal MedicineInternal Medicine physicians generally specialize in adult treatment prevention, diagnosis, and treatment of disease and chronic disorders.
  • General Practice – General practitioners are very similar to Family practice physicians and treat patients of all ages.

Visit the doctor

A face-to-face meeting and an office visit are the only ways to fully tell if you’ve chosen the correct doctor. Your primary care physician should be someone you can trust and rely on when it comes to managing your healthcare. Discuss any current medicines you’re taking as well as your medical history with him or her to ensure that you’re on the same page when it comes to managing chronic diseases.
You should also evaluate other environmental factors like hygiene, treatment methods, the doctor’s response towards you, etc.

Conclusion

While making a decision for a primary health provider, ask your friends, family, work colleagues, etc. The Internet can be quite useful for you. Here are the following things that you should consider before making a decision regarding your physician:

  • Area
  • Time and availability
  • Access to online health checkup
  • Language of communication

It may take some time and effort to find the appropriate provider, but the benefits of having a primary care physician you can trust and be comfortable with are paramount for your own health.

 

क्या होता है निमोनिया? जानिएं इसके लक्षण और बचाव के उपाय!

सर्दी का मौसम शुरू होते ही जुकाम और खांसी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। आमतौर पर हम जुकाम और खांसी से तो ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ बीमा​रियां ऐसी होती हैं जो सर्दी में अपना प्रकोप ज्यादा दिखाती हैं। उन्हीं में से एक नाम है निमोनिया संक्रमण

निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जो अधिकतर बच्चोंं में होती है और इससे दुनियाभर में हर साल हज़ारों बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है। हालांकि व्यस्क और वृद्धजनों को भी निमोनिया हो सकता है। निमोनिया होने का अधिक खतरा 65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों और 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा रहता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसकी समय पर पहचान और उपचार नहीं हो तो यह जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में हमारे लिए इस बीमारी के बारे में जानना आवश्यक है ताकि हम इसके लक्षणों की पहचान कर सके और समय पर उपचार भी ले सकें।

निमोनिया क्या होता है?

फेफड़ों में संक्रमण का हो जाना निमोनिया कहलाता है। इससे फेफड़े में सूजन की स्थिति बन जाती है। निमोनिया मुख्य रूप से विषाणु और जीवाणु के संक्रमण से होता है। यह वायरस, बैक्टीरिया और पेरासाइट्स के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा इसके कम तौर पर अन्य सूक्ष्मजीव, कुछ दवाओं और दूसरे रोगों के संक्रमण से भी होने की संभावना रहती है।

साथ ही अगर निमोनिया को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों और कारकों पर बात करें तो धूम्रपान, रोगी प्रतिरोधक क्षमता में कमी, अत्यधिक शराब पीना, फेफड़ों से जुड़ा गंभीर रोग, गंभीर गुर्दा रोग और यकृत रोग शामिल हैं। इसके अलावा कुछ दवाओं जैसे प्रोटॉन-पंप इन्हिबटर्स या H2 ब्लॉकर्स के उपयोग से भी निमोनिया का खतरा बढ़ने की संभावना रहती है। वृद्धावस्था में भी निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्थमा (दमा), हृदय रोग, ब्रोन्किइक्टेसिस आदि से पीड़ित मरीजों में भी निमोनिया का जोखिम ज्यादा रहता है।

निमोनिया कितने प्रकार का होता है?

निमोनिया पॉंच प्रकार का होता है, जो इस प्रकार है।

  • बैक्टीरियल निमोनिया
  • वायरल निमोनिया
  • माइकोप्लाज्मा निमोनिया
  • एस्पिरेशन निमोनिया
  • फंगल निमोनिया

निमोनिया संक्रमण के लक्षण क्या है?

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किसी भी बीमारी की पहचान के लिए उसके लक्षणों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे में निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी समय पर पहचान लिए जाए तो उपचार में आसानी रहती है। जानिएं निमोनिया के लक्षण

निमोनिया संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में खांसी, सीने में दर्द, बुखार और सांस लेने में कठिनाई होती है। साथ ही अगर आपका तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया है तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है।

  • सामान्य तौर पर फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं जो बाद में धीरे धीरे या फिर एक दम से बढ़ने लगते हैं।
  • रोगी में कमजोरी आ जाती है और थकान महसूस होती है।
  • रोगी को बलगम वाली खांसी आती है।
  • रोगी को बुखार के साथ पसीना आता है कंपकंपी महसूस होती है।
  • सांस लेने में कठिनाई होने से रोगी तेज या जोर जोर से सांस लेने लगता है।
  • रोगी को बेचैनी होती है।
  • रोगी को भूख लगनी कम या बंद हो जाती है।
  • बीपी का कम हो जाना
  • खॉंसी में खून आना
  • धड़कन का तेज हो जाना
  • मतली और उल्टी आना

बच्चों में भी निमोनिया के लक्षण इसी प्रकार समान रहते हैं।

निमोनिया की जांचें और उपचार

सामान्य तौर पर निमोनिया के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। अगर हम निमोनिया की जांच और उपचार पर बात करें तो डॉक्टर के द्वारा रोगी को छाती का एक्सरे करवाने का कहा जाता है। साथ ही स्टेथोस्कोप से फेफड़ों की गति सुनने पर डॉक्टर को फेफड़ोंं से कुछ आवाज आती हुई भी सुनाई देती है। इसके अलावा डॉक्टर्स के द्वारा खून की जांच, सीटी स्कैन, बलगम की जांच, ब्रोंकोस्कोपी आदि भी करवाने की सलाह दी जाती है।

अगर हम निमोनिया संक्रमण के उपचार की बात करें तो य​ह बीमारी की स्थिति, रोगी की उम्र पर भी निर्भर करता है। हालांकि डॉक्टर्स के द्वारा एंटीबायोटिक्स, खांसी कम करने की दवाएं, बुखार एवं दर्द कम करने की दवाएं दी जाती हैं ताकि रोगी को आराम मिल सके। इसके अलावा कुछ घरेलू उपायों के द्वारा भी रोगी को राहत देने का कार्य किया जाता है।

निमोनिया संक्रमण होने पर अस्पताल में भर्ती कब होना चाहिए?

चिकित्सकीय परामर्श के बाद अगर ​डॉक्टर को लगता है कि आपको अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए तब वे भर्ती होने की सलाह देते हैं। हालांकि इन विभिन्न परिस्थितियों में रोगी के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना रहती है, वह इस प्रकार हैं।

  • अगर रोगी की आयु 5 वर्ष से कम एवं 65 वर्ष से अधिक हो।
  • यदि रोगी में स्थान, समय एवं व्यक्ति को लेकर भ्रम की स्थिति हो।
  • अगर सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो।
  • अगर रोगी का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट तक हो।
  • यदि हार्ट बीट की दर 50 से कम या 100 से अधिक हो।

निमोनिया संक्रमण से बचाव के तरीके क्या है?

Pneumonia Infection prevention
प्रथम तौर पर जन्म के बाद टीकाकरण के माध्यम से निमोनिया को रोका जा सकता है। इसमें शिशुओं के लिए PVC13 और बच्चों व वयस्कों के लिए PPSV23 नामक टीके लगाए जाते हैं। निमोनिया से बचाव के लिए दूसरे तरीकों में धूम्रपान से दूरी, साफ सफाई रखने, मास्क पहनने, पौष्टिक आहार लेने, व्यायाम, योग के माध्यम से निमोनिया से बचा जा सकता है।

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