आज के समय में लोग अलग‑अलग तरह की बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहते हैं। इनमें कुछ समस्याएं तो ऐसी होती हैं, जिन्हें वह चिकित्सक या अन्य के समक्ष बताने से नहीं कतराते हैं लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें बताने में शर्मिंदगी महसूस होती है।
ऐसी ही एक शर्मिंदगी देने वाली समस्या है शरीर से जरूरत से ज्यादा पसीना आना, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। यह स्थिति भले ही जानलेवा और गंभीर नहीं हो, लेकिन यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, सामाजिक जीवन और रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करती है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि हाइपरहाइड्रोसिस क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसका इलाज कैसे किया जाता है।
हाइपरहाइड्रोसिस क्या होता है?
हाइपरहाइड्रोसिस एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति को शरीर से ज़रूरत से ज़्यादा पसीना आता है। यह पसीना किसी गर्मी, व्यायाम, चिंता और तनाव के कारण नहीं बल्कि अपने आप और अक्सर बिना किसी वजह के आता है। इस स्थिति में व्यक्ति के शरीर से पसीना आने का कारण स्पष्ट नहीं होता है। यह सर्दियों में भी आ सकता है।
दरअसल, हाइपरहाइड्रोसिस एक ऐसी अवस्था है जिसमें पसीने की ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए जितना पसीना जरूरी है, उससे कहीं अधिक पसीना निकलने लगता है। इसी के कारण व्यक्ति के शरीर से अनावश्यक पसीना आता है।
इस समस्या में कहां‑कहां और किस तरह का पसीना आता है?
हाइपरहाइड्रोसिस में अक्सर शरीर के कुछ खास हिस्से ज्यादा प्रभावित होते हैं, जैसे हथेलियां, पैरों के तलवे, अंडरआर्म्स और चेहरा, हालांकि कुछ लोगों में पूरे शरीर से भी अत्यधिक पसीना आ सकता है। हथेलियों और तलवों में लगातार नमी रहने से लिखने‑पढ़ने, मोबाइल या कीबोर्ड चलाने, हाथ मिलाने, चप्पल‑जूते पहनने जैसी साधारण गतिविधियां भी मुश्किल लगने लगती हैं।
हाइपरहाइड्रोसिस कितने प्रकार का होता है?
हाइपरहाइड्रोसिस को आमतौर पर दो मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है। प्राथमिक और द्वितीयक हाइपरहाइड्रोसिस।
प्राथमिक हाइपरहाइड्रोसिस में कोई स्पष्ट दूसरी बीमारी का संकेत नहीं मिलता है। इसमें पसीना प्रायः हथेलियों, तलवों, बगल या चेहरे जैसे हिस्सों में आता है और यह अक्सर बचपन या किशोरावस्था के समय से शुरू होकर युवावस्था तक चलता रहता है, जबकि द्वितीयक हाइपरहाइड्रोसिस किसी अन्य बीमारी या दवा के कारण पूरे शरीर में ज्यादा पसीना आने के रूप में दिखता है। इसमें दूसरी बीमारी के प्रभाव के कारण पसीना आता है।
हाइपरहाइड्रोसिस क्यों होता है? इसके कारण क्या हैं?
प्राथमिक हाइपरहाइड्रोसिस में सही कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, पर माना जाता है कि कुछ लोगों में पसीने की ग्रंथियों को नियंत्रित करने वाली नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। कई मामलों में यह समस्या परिवार में भी चलती है, यानी आनुवंशिक कारणों से भी ऐसा होता है।
जब यह किसी अन्य बीमारी या दवा के कारण होता है, तब इसके कारण निम्नलिखित हो सकते हैं।
- थायरॉयड की समस्या
- डायबिटीज
- मोटापा
- हार्मोनल असंतुलन
- गर्भावस्था
- संक्रमण
- कुछ दवाइयाँ
- तनाव या एंग्जायटी
हाइपरहाइड्रोसिस के मुख्य लक्षण क्या है?
- बिना कारण अत्यधिक पसीना आना
- हथेलियों का गीला रहना
- पैरों के तलवों में लगातार पसीना
- बगल से बहुत अधिक पसीना आना
- चेहरे और सिर पर पसीना
- पसीने के कारण स्किन इन्फेक्शन
- कुछ मामलों में शरीर से बदबू आना
- रात में बहुत ज्यादा पसीना आकर नींद से जागना आदि।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए ?
यदि सप्ताह में कई बार आपको बिना शारीरिक श्रम के भी इतना पसीना आता हो कि कपड़े बदलने पड़ें, आपका काम रुक जाए या आप लोगों के सामने जाने से बचने लगें, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
साथ ही, अचानक शुरू हुआ अत्यधिक पसीना, रात में बार‑बार पसीना आना, वजन कम होना, तेज धड़कन या कंपकंपी जैसे अन्य लक्षणों के साथ पसीना आना किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है, ऐसे में तुरंत जांच करानी चाहिए।
हाइपरहाइड्रोसिस का उपचार क्या है?
हाइपरहाइड्रोसिस का इलाज संभव है, और यह कई तरह से किया जा सकता है।
1. एंटीपर्सपिरेंट क्रीम और रोल-ऑन
2. दवाईयाँ
3. आयनटोफोरेसिस थेरेपी – इस प्रक्रिया में हल्के इलेक्ट्रिक करंट से हाथ और पैरों में पसीना कम किया जाता है। यह कई लोगों में सफल साबित होती है।
4. बोटोक्स इंजेक्शन
5. सर्जरी
6. घरेलू और जीवनशैली में सुधार
अगर आप भी समस्या से ग्रसित है या इसके लक्षण महसूस करते हैं तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। हाइपरहाइड्रोसिस का उपचार संभव है। लक्षण दिखने पर घबराएं नहीं और चिकित्सकीय परामर्श के साथ जीवन शैली में सुधार कर इससे निजात पाया जा सकता है।
