आजकल की भागदौड़ और व्यस्त भरी ज़िंदगी में गर्दन का दर्द, अकड़न और भारीपन आम बात हो गई है, लेकिन कई लोगों को एक अलग तरह की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है, और वह है गर्दन या सिर का अपने-आप हिलना या कांपना।

इस परेशानी में कभी सिर हां या ना की तरह हल्का-हल्का हिलता है, तो कभी गर्दन में झटके भी महसूस होते हैं, और व्यक्ति खुद भी समझ नहीं पाता कि यह कमजोरी है, कोई नस की समस्या है या फिर सिर की कोई बड़ी बीमारी।

इस तरह के गर्दन के कांपने को सामान्य भाषा में गर्दन कांपना कहकर टाल दिया जाता है। लेकिन मेडिकल की भाषा में इसे ट्रेमर या कुछ मामलों में सर्वाइकल डिस्टोनिया जैसे मूवमेंट डिसऑर्डर से भी जोड़ा जाता है।

इस आर्टिकल में हम इसी समस्या को लेकर विस्तार से जानेंगे।

गर्दन कांपने की समस्या क्या है?

सामान्य अर्थ में इसे समझे तो गर्दन कांपने की समस्या में गर्दन की मांसपेशियाँ बिना आपकी इच्छा के बार-बार सिकुड़ती और ढीली होती हैं, जिससे सिर या गर्दन में हल्का या तेज़ कंपन, झटके या घुमाव जैसा महसूस होता है। कई लोगों में यह समस्या कभी-कभार केवल कुछ सेकंड के लिए होती है, जबकि कुछ लोगों में लगातार या दिन में बार-बार ऐसा होता रहता है और रोज़मर्रा के कामों पर का विपरीत प्रभाव पड़ता है।

कई बार यह समस्या शरीर के किसी मूवमेंट डिसऑर्डर का हिस्सा होती है। जिसमें हाथ, सिर, आवाज़ या शरीर के दूसरे हिस्से में भी कांपने की समस्या देखने को मिलती हैं। इस समस्या में कुछ लोगों में केवल सिर-गर्दन ही कांपते हैं, जिसे हेड ट्रेमर या सर्वाइकल डिस्टोनिया से जुड़े ट्रेमर के रूप में भी देखा जाता है।

गर्दन कांपने के मुख्य कारण

गर्दन कांपने के कई कारण हो सकते हैं, जो कि हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ प्रमुख कारणों को ऐसे समझा जा सकता है।

  1. एसेंशियल ट्रेमर: यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें शरीर के किसी हिस्से में बार-बार कंपन होता है। इसमें आमतौर पर हाथ, सिर या आवाज़ पर असर देखने को मिलता है। शारीरिक गतिविधि पर कंपन ज़्यादा महसूस होता है।
  2. सर्वाइकल डिस्टोनिया (स्पास्मोडिक टॉर्टिकॉलिस): इसमें गर्दन की मांसपेशियाँ बहुत ज्यादा सिकुड़ जाती हैं, जिससे सिर एक तरफ़ मुड़ने, टेढ़ा होने है या अजीब स्थिति में जाने का खतरा रहता है। इसमें झटके के साथ कंपन्न महसूस हो सकता है।
  3. रीढ़/सर्वाइकल स्पाइन की समस्या: इसके अंतर्गत गर्दन की हड्डियों, नसों या स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव की वजह से भी हाथ-पैर के साथ-साथ कभी-कभी गर्दन या सिर में कंपन या झटके महसूस होने की संभावना रहती हैं।
  4. दवाइयों का दुष्प्रभाव: कुछ मनोरोग से जुड़ी दवाएँ, थायरॉयड की दवाएँ, या कुछ अन्य दवाइयाँ शरीर में कंपन जैसे साइड इफेक्ट डाल सकती हैं, जिससे भी यह समस्या देखने को मिलती है।
  5. हार्मोन और मेटाबॉलिक गड़बड़ी: इसमें थायरॉयड का ज़्यादा एक्टिव होना, लीवर या किडनी की गंभीर बीमारी, ब्लड शुगर की गड़बड़ी आदि समस्याएं भी कई बार इसे बढ़ा सकते हैं।
  6. नशा, कैफीन और अल्कोहल का सेवन: बहुत ज़्यादा चाय-कॉफ़ी पीना, शराब का ज़्यादा सेवन या अचानक शराब छोड़ देने से भी कंपन हो सकता है या पहले से चल रही इस समस्या को बढ़ा सकता है।
  7. तनाव और थकान: मानसिक तनाव, घबराहट, पर्याप्त नींद की कमी और शारीरिक थकान से भी कंपन हो सकता है या बढ़ सकता है।

गर्दन कांपने के लक्षण कैसे पहचानें?

हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर कुछ संकेत अक्सर दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • सिर का हां या ना के जवाब के संकेत जैसा हिलना, या कोई काम करते समय ज़्यादा दिख सकता है।
  • गर्दन का एक दिशा में मुड़ जाना या टेढ़ा रहना। साथ में दर्द, जकड़न और झटकेदार कंपन महसूस होना।
  • सिर को सीधा रखने में समस्या होना। आईने में देखने पर गर्दन का अक्सर टेढ़ा दिखना।
  • तनाव, घबराहट, तेज रोशनी, भीड़ या किसी मंच पर बोलते और परफॉर्मेंस देते समय गर्दन या सिर का कंपन बढ़ जाना।
  • कंपन के साथ-साथ गर्दन में दर्द, खिंचाव, कंधों में जकड़न, सिरदर्द या कभी-कभार चक्कर जैसा महसूस होना।

इस समस्या में कुछ लोगों में केवल गर्दन ही नहीं, बल्कि हाथ और शरीर के अन्य हिस्से भी साथ-साथ कांपने की समस्या देखने को मिलती है। जिससे लिखने, खाने, बोलने या कप पकड़ने जैसे सामान्य कामों में भी दिक़्क़त होती हैं।

डॉक्टर के पास कब ज़रूर जाएँ?

  • कंपन बार-बार हो रहा हो या कई हफ़्तों से लगातार चल रहा हो।
  • गर्दन के साथ-साथ हाथ-पैर भी कांपने लगें या फिर चलने-फिरने में बैलेंस नहीं बनें।
  • गर्दन टेढ़ी हो जाए, बहुत ज्यादा दर्द हो, या अचानक गंभीर जकड़न के साथ बुखार या कमज़ोरी आए।
  • बोलने, निगलने, दिखने या बैलेंस बनाने में समस्या देखने को मिले।

उपचार क्या है?

गर्दन के कंपन का उपचार इसके कारण पर निर्भर करता है। इसमें हर व्यक्ति के लिए दवा और परामर्श अलग हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह बहुत ज़रूरी है। सामान्य रूप से जो प्रमुख विकल्प उपयोग में लिए जाते हैं, उन्हें सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हैं।

1. दवाइयाँ

कुछ विशेष दवाएँ एसेंशियल ट्रेमर में कंपन कम करने के लिए दी जा सकती हैं। यह दवाई एक्सपर्ट की सलाह पर ही लेनी चाहिए। डॉक्टर आपकी समस्या और कारणों को समझकर उसके अनुसार दवाई देंगे।

2. बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटॉक्स) इंजेक्शन

बोटुलिनम टॉक्सिन नामक इंजेक्शन एक्सपर्ट डॉक्टर के द्वारा गर्दन की फिक्स जकड़ी हुई मांसपेशियों में बहुत कम मात्रा में लगाते हैं, जिससे वे मांसपेशियाँ कुछ महीनों के लिए ढीली पड़ जाती हैं और कंपन या टेढ़ापन कम हो जाता है।

3. फिज़ियोथेरेपी और व्यायाम

सामान्य स्ट्रेचिंग व्यायाम, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले अभ्यास आदि दर्द और खिंचाव में काफ़ी राहत मिल सकती है।

4. सर्जरी (केवल चुनिंदा या गंभीर मामलों में)

जब दवाइयाँ और इंजेक्शन से भी राहत नहीं मिले और कंपन बहुत ज्यादा हो, ऐसी स्थिति में डीप ब्रेन स्टिम्यूलेशन (DBS) नामक सर्जरी की जाती है। इसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में बेहद पतले इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जिससे असामान्य कंपन पैदा करने वाले सिग्नल नियंत्रित किए जा सकें। यह जटिल और महंगी प्रक्रिया है।

5. जीवनशैली में सुधार

हम अपने जीवन शैली में सुधार करके भी समस्या से राहत प्राप्त कर सकते हैं। इसके तहत चाय कॉफी और कैफीन का सेवन कम करना। शराब से सावधानी, पर्याप्त नींद और तनाव नहीं लेना आदि।

क्या यह हमेशा गंभीर बीमारी है?

हर गर्दन कांपना गंभीर बीमारी नहीं होता है। कभी कभार हल्की थकान, तनाव या कैफीन से भी कुछ देर हल्का कंपन हो सकता है जो आराम और जीवनशैली सुधार से ही ठीक हो जाता है।

लेकिन यदि यह समस्या बार-बार, लगातार या बढ़ती जाए, और इसके साथ दर्द, गर्दन टेढ़ी होना, चलने-फिरने में दिक़्क़त, बोलने-निगलने में समस्या जैसे लक्षण भी दिखे तो इसे नज़र अंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इसका उचित उपचार कराना चाहिए।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह के गर्दन कांपने, सिर हिलने या न्यूरोलॉजिकल समस्या के लिए स्वयं इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से जाँच और सलाह लेना आवश्यक है।