गर्भावस्था महिला के जीवन का सबसे नाज़ुक और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान मां के शरीर में होने वाला हर बदलाव गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। लेकिन कई बार पोषण की कमी, जानकारी के अभाव या लापरवाही के कारण कुछ समस्याएं गंभीर रूप ले लेती हैं। इन्हीं में से एक आम लेकिन खतरनाक समस्या है गर्भावस्था में खून की कमी, जिसे एनीमिया कहा जाता है। बहुत सी महिलाएं इसे सामान्य कमजोरी मानकर अनदेखा कर देती हैं, जबकि यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
एनीमिया क्या होता है?
जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो इस स्थिति को एनीमिया कहा जाता है। हीमोग्लोबिन खून का वह तत्व होता है जो शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर को अतिरिक्त खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है, क्योंकि उसी के जरिए बच्चे का विकास होता है। अगर इस समय हीमोग्लोबिन कम हो जाए, तो शरीर और गर्भ में पल रहे बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
गर्भावस्था में खून की कमी के लक्षण?
गर्भावस्था में एनीमिया के लक्षण कई बार धीरे-धीरे सामने आते हैं और महिलाएं इन्हें सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं। लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो इन्हें गंभीरता से लेना ज़रूरी है।
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
- थोड़ा चलने या काम करने पर सांस फूलना
- चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना
- दिल की धड़कन तेज़ होना
- चेहरे, होंठों और नाखूनों का पीला पड़ना
- सिरदर्द रहना
- हाथ-पैर ठंडे लगना
- सीढ़ियां चढ़ते समय अत्यधिक थकावट
गर्भावस्था में खून की कमी के कारण?
एनीमिया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और अक्सर एक से अधिक वजहें एक साथ काम करती हैं। गर्भावस्था में शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं, लेकिन अगर पोषण सही न मिले तो खून की कमी हो जाती है।
- आयरन की कमी
- फोलिक एसिड और विटामिन बी12 की कमी
- गर्भावस्था से पहले ही हीमोग्लोबिन कम होना
- बार-बार उल्टी होना या खाना ठीक से न पचना
- गलत खान-पान और पोषण की कमी
- कम अंतराल में बार-बार गर्भधारण
- चाय या कॉफी का अत्यधिक सेवन
- आयरन की दवाइयों को नियमित न लेना
- किसी पुरानी बीमारी या संक्रमण की वजह से
एनीमिया बच्चे के लिए क्यों खतरनाक हो सकता है?
गर्भावस्था में खून की कमी का असर केवल मां तक सीमित नहीं रहता। जब मां के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो बच्चे तक भी पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे बच्चे का वजन कम रह सकता है, समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ सकता है और बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गंभीर मामलों में यह स्थिति नवजात के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है।
गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के उपाय
गर्भावस्था में एनीमिया को समय रहते कंट्रोल किया जा सकता है, बशर्ते सही खान-पान और डॉक्टर की सलाह का पालन किया जाए। हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए जीवनशैली और आहार दोनों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।
- हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों का सेवन करना
- चुकंदर, अनार, सेब, खजूर और किशमिश को आहार में शामिल करना
- दालें, चना, राजमा और सोयाबीन का नियमित सेवन
- सीमित मात्रा में गुड़ का उपयोग
- विटामिन C से भरपूर फल जैसे नींबू, आंवला और संतरा खाना
- डॉक्टर द्वारा दी गई आयरन और फोलिक एसिड की दवाइयों को नियमित लेना
- चाय और कॉफी का सेवन कम करना
- पर्याप्त आराम और नींद लेना
- समय-समय पर ब्लड जांच कराना
नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह क्यों ज़रूरी है?
गर्भावस्था के दौरान नियमित ब्लड टेस्ट बहुत जरूरी होते हैं। इससे समय रहते हीमोग्लोबिन की कमी का पता चल जाता है और गंभीर स्थिति बनने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां बंद करना या बदलना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इलाज को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
गर्भावस्था में खून की कमी एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जिसे नजरअंदाज़ करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। सही समय पर पहचान, संतुलित आहार, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से एनीमिया को नियंत्रित किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि मां का स्वास्थ्य ही बच्चे के सुरक्षित भविष्य की नींव होता है।
