अक्सर आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि जैसे ही बिस्तर पर लेटता हूँ तो कमरा घूमने लगता है या फिर अचानक सिर घुमाने पर ऐसा लगता है जैसे आसपास सब गोल‑गोल घूम रहा हो, और यह अपने आप थोड़ी देर में खुद ही ठीक हो जाता है।

ऐसा होने पर ज़्यादातर लोग घबरा जाते हैं, और सोचते हैं कि हमारा बीपी लो हो गया है, कोई कोई इस कमजोरी भी बताता है लेकिन हर बार ऐसा ही हो, जरूरी नहीं है। असल में, कई बार इसका कारण हमारे अंदरूनी कान की एक समस्या हो सकती है, जिसे बी.पी.पी.वी. कहा जाता है। हालांकि हर बार आने वाला चक्कर बी.पी.पी.वी. ही हो, यह भी ज़रूरी नहीं है।

बी.पी.पी.वी. क्या होता है?

हमारे कान के भीतर बहुत ही नाज़ुक संतुलन तंत्र होता है, जो यह महसूस करता है कि हमारा सिर किस दिशा में है, हम सीधे खड़े हैं या झुके हुए हैं। इसी के जरिए अपने दिमाग़ को पता चलता है कि शरीर का बैलेंस कैसे बनाकर रखना है। इस तंत्र में बहुत छोटे‑छोटे कैल्शियम जैसे क्रिस्टल होते हैं, जो कभी‑कभी अपनी मूल जगह से हटकर पास की नलिकाओं में चले जाते हैं।

जब ऐसा होता है, और इसी दौरान हम जब सिर की पोज़िशन अचानक बदलते हैं, तो ये क्रिस्टल उस नलिका के अंदर हिलते हैं और दिमाग़ को गलत सिग्नल पहुंचाते है। जिसकी वजह से हमें अचानक तेज़ घूमने जैसा या चक्कर आना महसूस होता है, और कुछ सेकंड बाद जब क्रिस्टल शांत हो जाते हैं, तो चक्कर भी अपने‑आप कम हो जाता है। यही स्थिति बी.पी.पी.वी. कहलाती है।

बी.पी.पी.वी. के सामान्य लक्षण

अगर किसी को बी.पी.पी.वी. है, तो सामान्य रूप से चक्कर की एक खास अलग पैटर्न देखने को मिलती है, जो इस प्रकार हैं।

-जब भी हम बिस्तर पर लेटते हैं, उठते हैं या करवट बदलते हैं, तो अचानक कुछ सेकंड के लिए तेज़ घूमने जैसा चक्कर महसूस होता है।
– कभी‑कभी झुककर कुछ उठाने, सिर ऊपर करके पंखा या ट्यूब लाइट देखने, या फिर अचानक सिर एक तरफ़ मोड़ने पर भी इसी तरह का महसूस होता है।
– इस समस्या में चक्कर थोड़ा समय के लिए रहता है, और फिर अपने‑आप कम हो जाता है, लेकिन दिन में कई बार चक्कर आना महसूस हो सकता है।
– इसके अलावा चक्कर के साथ में उल्टी, घबराहट या असंतुलन महसूस हो सकता है, जैसे चलने पर लगता है कि ज़मीन घूम रही है।

आम तौर पर ऐसा होने पर कान में तेज़ दर्द, कान में बजना, अचानक सुनने की क्षमता कम होना या फिर चेहरा और हाथ‑पैर सुन्न पड़ने जैसी शिकायतें देखने को नहीं मिलती है। लेकिन अगर ऐसे लक्षण भी में साथ हों, तो दूसरी गंभीर वजहें भी हो सकती हैं।

क्या हर पोज़िशन पर आने वाला चक्कर बी.पी.पी.वी. होता है?

नहीं, ऐसा ज़रूरी नहीं है। सिर घुमाने या पोज़िशन बदलने पर आने वाले चक्कर की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।

कभी‑कभी कान के अंदर सूजन या संक्रमण होने से भी चक्कर आना, कान में भारीपन के साथ चलने में असंतुलन महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में मेनिएर नाम की बीमारी में भी चक्कर के साथ कान में भारीपन लगना, सीटी या भनभनाहट की आवाज़ और सुनने में कमी की समस्या देखने को मिलती है।

इसके अलावा माइग्रेन से ग्रसित लोगों को भी ऐसे चक्कर आते हैं, जिनमें रोशनी, आवाज़ या कुछ खास खाने‑पीने की चीज़ें प्रभावित करती हैं। कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी ऐसा हो सकता है।

बी.पी.पी.वी. होने के कारण क्या हैं?

कई बार बी.पी.पी.वी. बिना किसी ख़ास कारण के भी हो जाता है। यह समस्या खासकर मिडल एज और बुज़ुर्गों में देखने को मिलती है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ कारण हैं, जिससे भी बी.पी.पी.वी. हो सकता है।

– अगर सिर पर चोट लगी हो, या पहले कभी एक्सीडेंट हुआ हो और उस समय दिमाग़ को झटका पहुँचा हो, तो अंदरूनी कान के क्रिस्टल ढीले हो सकते हैं।

– जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति (पोजिशन) में लेटा रहा हो, जैसे बड़ी सर्जरी के बाद तब भी ऐसा होने की संभावना रहती है।

– उम्र बढ़ने के साथ ये कण ज़्यादा नाज़ुक हो जाते हैं, और उनके अपनी जगह से खिसकने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए बुज़ुर्गों में बी.पी.पी.वी. होने की संभावना ज्यादा रहती है।

– कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों या पहले से चल रही संतुलन संबंधी दिक़्कतों से ऐसा हो सकता है।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है?

अगर चक्कर सामान्य हैं, कभी‑कभार आते हैं और खुद ही कुछ सेकंड में समाप्त हो जाते हैं, तो इसे सामान्य मान सकते हैं। लेकिन जब निम्नलिखित लक्षण भी साथ में देखने को मिले तो, डॉक्टर को अवश्य दिखाएं।

– यदि चक्कर रोज़ आते हों, दिन में कई बार आते हों या कई दिनों से ऐसा हो रहा हो।
– चक्कर के साथ बोलने में दिक़्कत, चेहरा टेढ़ा लगना, हाथ‑पैर में कमज़ोरी या सुन्नपन, डबल दिखना, बहुत तेज़ सिरदर्द या बेहोशी जैसा महसूस हो।
– जब कान से पानी या खून आए, सुनाई देना अचानक बहुत कम हो जाए या कान में बहुत ज़्यादा दर्द हो।

ऐसी स्थिति में खुद इलाज करने की बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।

बी.पी.पी.वी. का इलाज क्या है?

बी.पी.पी.वी. को लेकर अच्छी बात यह है कि अधिकतर मामलों में यह दवाइयों के बजाय कुछ ख़ास तरह की एक्टिविटीज से ठीक किया जा सकता है। इन एक्टिविटीज को “रीपोज़िशनिंग मैन्युवर” कहा जाता है।

इसमें सबसे पॉपुलर एप्ली मैन्युवर है। इसमें डॉक्टर या विशेषज्ञ फिज़ियोथेरेपिस्ट आपको एक विशेष क्रम में लिटाते, सिर घुमाते और बैठाते हैं, ताकि जो क्रिस्टल गलत नलिका में चले गए हैं, वे फिसलकर वापस उस जगह चले जाएं। जिससे कि दिमाग़ को गलत सिग्नल न भेज सके।

जिन लोगों को लंबे समय से चक्कर की समस्या हो, उसे ठीक करने के लिए कुछ खास एक्सरसाइज़ और वेस्टिब्युलर रीहैबिलिटेशन प्रोग्राम भी कराए जाते हैं। इससे शरीर और दिमाग़ दोनों की स्थिति सही होती है और रोज़मर्रा के काम करने में आत्मविश्वास बढ़ता है।

इसके अलावा बी.पी.पी.वी. में डॉक्टर दवाइयां भी देते हैं लेकिन यह दवाइयां इस समस्या के मूल कारण को ठीक नहीं कर पाती हैं, इसलिए एक्टिविटीज और एक्सरसाइज करवाई जाती है जिससे कि आराम मिल सके।